Thursday, January 27, 2011

बिल्डर उड़ाते हैं नियमों की धज्जियां

उ०प्र० फ्लैट्स एक्ट २०१० के अनुसार प्रत्येक वह भवन, जिसमें चार से अधिक फ्लैट बने हों, उसे कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है और ऐसे भवन ही इस एक्ट की सीमा में आते हैं. इस एक्ट के अनुसार भूमि की वैधता नक्शे की स्वीकृति के साथ ही उसकी ऊँचाई के लिए नगर के हवाई एक्ट को भी मानना होता है. विद्युत और अग्शिमन विभागों का भी इन भवनों के निर्माण के पूर्व अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होता है. ऐसे भवनों राजस्व के सभी विभागों की निगाहों में निर्मित होते हैं. कहा जा सकता है कि कोई भी बहुमंजिल आवासीय भवन चुपके से नहीं बन सकता. सूत्र बताते हैं कि कानपुर में १४ मंजिल तक ऊँची इमारतें है. बिल्डर सदैव इन्हें (+१) के नियम के तहत स्वीकृत कराता है और सदैव एक मंजिल कम करके बनाता है, जिसे वह जब चाहे तब बना व बेच सके. शहर में १४-१५ बड़े व ३०-३५ छोटे बिल्डर्स हैं. और लगभग १५० से अधिक ६ मंजिल से अधिक की इमारतें हैं, जिनमें हजारों लोग रह रहे हैं. कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष रामस्वरूप अवैध बिल्डिंगों का निर्माण रोकने के लिए अपनी तैयारी बताते हैं, कि पूरे नगर को चार जोनों में बांट दिया गया है. मूलगंज के पास एक बिल्डिंग के निर्माण को रोक दिया गया है. लेकिन ऐसे भवन निर्माता शमन शुल्क जमाकर अपने अवैध निर्माण को नियमित करा लेते हैं. उनका कहना है कि बहु मंजिली आवासीय भवनों को कई स्तरों पर जांच के दायरे में आना पड़ता है और बिना कानूनी प्रक्रिया पूरी किए उसका निर्माण संभव नहीं है. के.डी.ए के सूत्र बताते हैं कि मूल नक्शा व तैयार बिल्डिंग के अन्तर को ठीक कराने के नाम पर वसूला जाने वाला शमन शुल्क ही वह खेल है, जिसके बहाने अवैध निर्माण को वैध करार दे दिया जाता है. कोकाकोला चौराहे पर बनी बिल्डिंग सालों साल जिस आधार पर अवैध थी, अचानक ही वैध घोषित हो जाती है. इसी प्रकार की अन्य घटनाएं भी हैं, जो केडीए उपाध्यक्ष की बयानबाजी की पोल खोलती हंै. कभी किसी निर्माण क्षेत्र को सील करना फिर बाद में पुन: कार्यकारी कर दिया जाना वह कृत्य है जिससे केडीए के रसूख में कमी आई है और भवन निर्माताओं में भय नहीं रह गया है. शहर में कई प्रमुख चौराहों पर इन आवासीय परिसरों के विज्ञापन देखे जा सक ते हैं. कानपुर नगर के जिलाधिकारी मुकेश मेश्राम कहते हैं कल्याणपुर क्षेत्र कभी नगरीय सीमा में नहीं था, किंतु अब इन आवासीय योजनाओं का प्रसार सर्वाधिक इसी क्षेत्र में हो रहा है. किसान खेत खलिहान और तालाब बेचने में लगा है. बिल्डर इस क्षेत्र में ग्राम समाज की जमीनों को भी तेजी से हड़पते जा रहे हैं. सभी सरकारी विभागों को आदेश दिया गया है कि वे अपनी सरकारी जमीन का चिन्हींकरण कर सीमा बनाएं, जिससे उस पर अवैध कब्जे होने से रोका जा सके. जिन जमीनों पर कब्जे हो गए हैं, वे अवश्य ही खाली कराए जाएंगे चाहे कब्जेदार कितने ही ताकतवर क्यों न हों.1हेलो संवाददाता
२० नवम्बर के अंक में प्रकाशित

No comments:

Post a Comment

There was an error in this gadget

Total Pageviews