Wednesday, March 21, 2012

युवाओं के बहाने खुद का भविष्य बनाने में मस्त ‘दलाल’



    कानपुर छात्र-छात्राओं के सुनहरे भविष्य के निर्माण के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं कि तैयारी कराने के केंद्र के रूप में देश-भर में विख्यात हो चुका है. कानपुर में आई. ई. टी. और एच. बी. टी. आई. सहित बीस से अधिक इंजीनियरिंग संस्थानों और गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कालेज सहित तीन मेडिकल कालेज हैं. हाल में पाँच से अधिक एम.बी.ए. कालेज भी उत्तर प्रदेश प्राविधिक शिक्षा विभाग से संबद्ध हो चुके हैं. देश भर से लगभग बीस से पच्चीस हज़ार प्रतियोगियों को यहाँ के कोचिंग संस्थान तैयारी करवाते हैं. छह से आठ घंटे की कोचिंग में पढाई और उसके बाद घर पर आठ-दस घंटे कि तैयारी के बाद इन युवाओं को अपने भविष्य को सुनहरा बनाने वाले संस्थानों में प्रवेश मिल पाता है. किन्तु अच्छी रैंकिंग ना पा सकने वालों कि बड़ी संख्या के कारण एक खास वर्ग लाभ उठाता है जो दलाली से शुरू हुआ था और अब कोचिंग संचालक और  संस्थान चलने वाला भी बन चुका है. इस तरह युवाओं में अपने सपनों को पूरा करने भारी कीमत उनके अभिभावक इस दलालों को अदा करते हैं. जिसकी बदौलत ये लगातार उन्नति करते जा रहे हैं. पहले दलाली कहा जाने वाला ये व्यवसाय अब कंसल्टेंसी ब्यूरो कहलाने लगा है. प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान और अध्यापक के चयन से शुरू होकर होस्टल दिलवाने और प्रवेश परीक्षा में असफल हुए युवा को उसका मनचाहा संस्थान डाक्टर, इंजीनिअर और प्रबंधक बनने में सहायक होने वाला ये दलालअब वास्तव में भगवान का आधुनिक अवतार है.
          अब ये काम छोड़ चुका दलाल मंटू राठौर बताता है एमिटी कालेज, गाजियाबाद, गलगोटिया कालेज, सिम्बायोसिस कालेज, रामा मेडिकल कालेज, महाराणा प्रताप, प्रानवीर सिंह इंजीनियरिंग और प्रबंधन कालेज, एक्सिस ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूशंस, भाभा इंजीनियरिंग संस्थान, स्वरुपस कालेज आदि में उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण विभाग गरीब और पिछड़ी जाति के विद्यार्थियों के लिए वार्षिक बीस हजार मिलता है, जिसे दलालों के माध्यम से प्रवेश पाए छात्रों को न मिलकर प्रबंधन अपने खाते में रख लेता है. इसके अतिरिक्त प्रत्येक छात्र के एडमिशन पर पच्चीस से पचास हज़ार रुपये दलाली मिलती है. उसका कहना है कि ये दलाली का धंधा इतना लाभ का है कि बहुत से कोचिंग संस्थानों के अध्यापक जैसे अमित दीक्षित, मनीष सिंह 7कोबरा’, संजीव राठौर, महेश सिंह चौहान आदि पढाने में कम एडमिशन के खेल में ज्यादा लिप्त रहते हैं.  यदि उनकी संपत्ति कि जांच करवा ली जाए तो सारा खुलासा हो जाएगा. इसी तरह की कमाई से महेश सिंह चौहान के इंजीनियरिंग कालेज स्थापित बताये जाते हैं.
   सूत्रों कि माने तो इन्हीं दलालों कि दम पर आज तमाम नए कालेज स्थापित किये जा रहे हैं. दलालों कि क्षमता पर यकीन के चलते अध्यापकों के साथ राजनेता और पूंजीपति कालेज स्थापित करने के कम में शामिल हुए हैं. केवल इंटर मीडिएट उत्तीर्ण राज कुशवाहा नामक फिजिक्स के अध्यापक के साथ एन.एच.आर.एम. घोटाले के आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा ने मिलकर एक्सिस ग्रुप ऑफ इन्स्टिट्यूशंस बनाया तो दूसरी तरफ महेश सिंह चौहान के साथ बसपा के नेता के. के. सचान ने भाभा इंजीनियरिंग कालेज स्थापित किया. राज कुशवाहा ने तो विश्वविद्यालय भी स्थापित कर लिया है. बाबू सिंह कुशवाहा के सी.बी.आई. के जांच दायरे में आने के बावजूद इस संस्थान में लगातार धन का निवेश जारी है. बिना बहुत छात्रों के संस्थान में धन के लगातार निवेश में राज कुशवाहा के प्रवेश में दलाली के धंधे का बड़ा योगदान बताया जाता है.  मंटू राठौर बताता है ,साल्वेंट और नेफ्था केमिकल का व्यवसाय करने वाला प्रान्वीर सिंह ने गोपाल शर्मा नामक दलाल की दम पर दो संस्थान स्थापित किये जिनमें इंजीनियरिंग और प्रबंधन कि पढाई कराई जाती है गोपाल शर्मा इन दोनों के अतिरिक्त देश भर के सभी सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में प्रवेश का जिम्मा लेता है. उसके बदले में मोटी रकम वसूलता है.
     कहा जाता है कि अगर धन देकर कम हो जाए तो भी ठीक है. परन्तु तमामों ऐसे मामले हर बार सामने आते हैं जब कि ये दलाल सुनहरे सपने संजोये युवा के अभिभावक की गाढ़ी कमाई को ले उड़ते हैं. एडमिशन भी नहीं कराते और पुलिस इस मामले को संज्ञान में नहीं लेती. पीड़ित छात्रों कि माने तो स्थानीय काकादेव थाना भी इन दलालों से मिला हुआ बताया जाता है. इस तरह लुटा हुआ छात्र कहीं का नहीं रहता है. हाल में कई दलालों ने अपना बाकायदा आफिस खोलकर व्यवसाय शुरू किया है. शील सचान काकादेव में और विकल बाजपेयी मालरोड अपनी कंसल्टेंसी स्थापित किये हुए है जहां से ये सभी कालेजों में एडमिशन का जिम्मा  लेते हैं . इसी प्रकार छात्र बनकर पढ़ने और भविष्य संवारने आये विकल वर्मा और शाहनवाज जैसे हज़ारों छात्र भी इस दलाली के चोखे धंधे में लिप्त हैं. अब बारी सरकार कि है जो सपने कि खरीद-फरोख्त में कमाई करने वालों पर अंकुश लगाये. जिससे इस अवैध व्यवसाय को रोका जा सके. वरना इस कमी के फेर में ये शिक्षा के लिए मशहूर क्षेत्र अपराधियों और दलालों की गतिविधियों का अड्डा बन जाएगा.

1 comment:

  1. bahut sundar aur bebak andaz me kah dala aapne. aapka sahas sarahniy hai.

    ReplyDelete

There was an error in this gadget

Total Pageviews