Monday, February 7, 2011

..... कहो , जय गंगा मैया

............पहचान पाए या नहीं ? ये है गंगा मैया . कहो जय गंगा मैया. अरे मजाक नहीं कर रहा हूँ. ये कानपुर के सरसैया घाट या फिर जाजमऊ का नहीं, निचली गंगा नहर का एक दृश्य है. वास्तव में , ये भी गंगा का एक भाग है.राजा सगर के कुछ ऐसे अनतरे वंशजो को तारने के लिए ही अब ये महानदी नहर के रूप में हैं.
ज़रा गौर करो, ये गंगा ही तो है जो हम...ारे शरीर में खुल का एक-एक बूँद बनकर बह रही है. यदि ये पावन जल न होता तो कृषि कार्यों के आवश्यक पानी न मिल पाता और हम सब प्यासे ही नहीं भूखों से भी मर जाते.वो बात अलग है कि अब न्यायालय ने भी कह दिया है , नहरों में पानी नदिओं से ज्यादा नहीं होना चाहिए.
नहीं समझे,मैं समझाता हूँ, बांधों के जरिये रोके गए पानी का रुख हमारे युग के मानव ने खेतों कि ओर मोड दिया है.बिना पानी के जीवन कि कल्पना ही नहीं कि जा सकती.पर क्या यही सही विकल्प है ? हमारे देश में तालाबों और दूसरे प्राकृतिक जल-श्रोतों कि स्थिति अत्यंत दयनीय हो जाने से नदिओं पर हमारी निर्भरता का बढ़ना हितकारी नहीं. ये अब हमें जान-समझ लेना ही चाहिए.
सुधरने का प्रयास करें और सोचें इस दिशा में कि हम में से ही कोई इस पानी का चोर और डकैत तो नहीं.जल-संरक्षण कि दिशा में कुछ काम करें क्योंकि इस जल-धारा कि सीमा है. प्रकृति को कुछ वापस करने कि दिशा में भी काम होना ही चाहिए.वैसे भी अटल जी कह चुके हैं कि तीसरा विश्व युद्ध पानी के लिए होगा.
इसलिए एक बार फिर से ....... जय गंगा मैया.

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