Monday, November 7, 2011

पत्रकार प्रमोद तिवारी की फेसबुक और जीमेल आई.ड़ी. का पासवर्ड चोरी "इक आग लगा ली है, इक आग बुझाने में......"

               कानपुर के वरिष्ठ पत्रकार ,कवि और कानपुर में अन्ना अनशन के समय के सबसे बड़े आन्दोलन स्थल के व्यूह्कार प्रमोद तिवारी के साथ एक हादसा घट गया है. आज की तकनीकी की दुनिया में उनकी कोई चूक उन्हें कितनी महेंगी पड़ेगी ये उन्हें उम्मीद न थी. पिछले दिनों जब वो कवि-सम्मलेन के सिलसिले में कानपुर से बाहर गए हुए थे तब ये घटना घटी. यद्यपि वो इंटरनेट की दुनिया को बनावटी और नकली दुनिया मानते हैं परन्तु इस दुनिया के द्वारा की गयी उनके साथ इस हसीन शरारत को लेकर वो काफी तनाव में हैं. वो सोच नहीं पा रहे हैं की उनके साथ ये और ऐसा हादसा क्यों , कैसे और किसने किया है ??
              हुआ यूं की जब वो पिछले सप्ताह  कवि-सम्मलेन में कानपुर से बाहर गए हुए थे तो उस रात वो  मुझ सहित तमाम दोस्तों को देर रात आनलाइन दिखे. सभी जानते हैं की वो देर रात कम्प्युटर पर काम नहीं करते हैं. शक होने पर जब बात की गयी तो दूसरी तरफ से बात नहीं की गयी. दुसरे दिन भी सुबह बहुत जल्दी उनकी आई.डी. आनलाइन हो गयी. बात का जवाब फिर नहीं मिला. दिनभर की व्यस्तता के बाद शाम को जब बात हुयी तो उन्होंने बताया की शायद किसी ने उनका पासवर्ड जानकर फेसबुक आई.डी. चलाई थी. इस दौरान उस फर्जी व्यक्ति ने  प्रमोद तिवारी कवि बनकर उनके साथ जुडी तमामों महिला मित्रों से अश्लील और अभद्र बातें की.ये उन्हें फेसबुक में जाने के बाद जल्दी ही पता चल गया. पहले उन्हें किसी कम मेच्योर व्यक्ति की ये शरारत जान पड़ी. इस शरारत पर उन्हें कुछ लोगों पर शक था. पर इसी बीच जब तक वो पासवर्ड बदल पाते तब तक दूसरी तरफ से पासवर्ड बदल दिया गया.
              इसके बाद उन्होंने अपने एक करीबी तकनीकी विशेषज्ञ से इस बारे में सलाह ली पासवर्ड बदलवाया और घर आ गए. एक दिन बाद उन्हें पता चला की फेसबुक की आई.डी. का पासवर्ड  फिर बदल गया है. जब दुबारा उन्होंने जीमेल की आईडी  पर रिकवरी के लिए जाना चाहा तो जान पाए की किसी ने जीमेल का पासवर्ड भी बदल दिया था.ये बात जानकर वो  अत्यंत परेशान हुए. यद्यपि वो इस फेसबुक सहित इंटरनेट की दुनिया को निरी झूठी मानते हैं पर इस झूठी दुनिया में घटी इस दुर्घटना का कष्ट उन्हें हुआ. वो अक्सर कहते हैं की क्या असली दुनिया में दुश्मन कम हैं जो इस नकली दुनिया में हम और दुश्मन बना बैठें. मुझे उनका एक शेर याद आता है - मैं झूम के गाता हूँ, कमज़र्फ जमाने में, इक  आग लगा ली है इक आग बुझाने में. मुझे ये पंक्तियाँ सर्वथा सही लगती हैं क्योंकि अब उन्होंने अपने साथ हुयी इस दुर्घटना को मुद्दा बनाने का मन बना लिया है. जल्द ही कोई मासूम चेहरे का महान साइबर अपराधी प्रमोद तिवारी "ए सिम्पिल पोएट, टिपिकल जर्नलिस्ट" के साथ किये गए जुर्म की सज़ा में पुलिस की गिरफ्त में होगा.सूत्रों का मानना है की उनका कोई अत्यंत करीबी इसमें लिप्त होगा. परन्तु संभव है की इसमें भी दिग्विजय सिंह की साजिश हो. अन्ना आंदोलन में मुख्य भूमिका अदा करने के कारण भी उनके साथ ऐसा हो सकता है.

2 comments:

  1. comic tragedy event....nice writing sir......Ashish Prakhar

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  2. ऐसा भी होता है पता नहीं था, तो अब कैसे पासवर्ड प्रोटेक्ट करेगें

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