Tuesday, July 19, 2011

है या नहीं का भ्रम

            लोग शिकायतों का पुलिंदा होते हैं, ये मान कर ही अधिकारी उन्हें खुद से दूर रखते हैं.इसकी वजह होने और न होने का भ्रम है. जिसके गूढ़ रहस्यों को समझना होगा.आते ही शिकायत दर्ज कराते हैं , नल है मगर पानी नहीं है. ये बिचारे नहीं जानते की इस  देश में चीजें होती इसीलिए हैं की उनमें वह न हो जिसके लिए वे होती हैं.
            नल है,मगर पानी नहीं आता. हैंडपंप हैं,मगर चल नहीं रहे. विभाग हैं, काम नहीं करते. टेलीफोन लगाया, लगा नहीं. अफसर हैं, मगर छुट्टी पर हैं. बाबू है, मगर उसे काम नहीं पता है. आवेदन किया था, मंजूर नहीं हुआ. रिपोर्ट लिखाई थी, कुछ हुआ नहीं. जांच हुयी थी, रिपोर्ट नहीं आई. योजना स्वीकृत है, पर बजट मंजूर नहीं है. बजट स्वीकृत है, रुपया नहीं आया. पद है, पर आजकल खाली है. आदमी योग्य था, तबादला हो गया. आफिसर ठीक है, मगर उसके मातहत खाली हैं. भाई, मातहत तो काम करना चाहते हैं, ऊपर से ऑर्डर नहीं आता. मशीन आ गयी, बिगड़ी पड़ी है. कारखाना है, बिजली नहीं है. उत्पादन हो रहा है, बिक्री नहीं है. मांग है तो पूर्ती नहीं है. पूर्ती कर सकते है, कोई डिमांड नहीं है.
            यात्री खड़े हैं, टिकिट नहीं मिल रहा है.टिकिट मिल गया, ट्रेन लेट है. गाडी आई, जगह नहीं थी. जगह मिली,सामान रखा था. एअर  का टिकिट लिया, वोटिंग लिस्ट में है. सीट कन्फर्म हुयी, फ्लाईट कैंसल हो गयी. घर पहुंचे तो वो मिले नहीं. मिले, मगर जल्दी में थे. तार भेजा, देर से पहुंचा. चिट्ठी भेजी, जवाब नहीं मिला.
             आये, पर आते ही बीमार पड़ गए. इंजेक्शन दिया, पर कुछ फरक न पड़ा.अस्पताल गए, बेड खाली नहीं था. बेड पर पड़े हैं, कोई पूछनेवाला नहीं है. शिकायत करें, मगर की सुननेवाला नहीं है. नेता हैं, मिल नहीं सके. सुन तो लिया, कुछ किया नहीं. शिलान्यास हुआ, इमारत नहीं बनी. बिल्डिंग है, मगर दुसरे काम में आ रही. हाँ, काम चल रहा है, मगर हमें क्या फायदा! स्कूल है, पर हमारे बच्चे को एडमीशन नहीं मिला . पढ़ने गए थे, बिगड गए. टीम भेजी थी, हार गयी. प्रोग्राम हुआ था, मगर जमा नहीं. हास्य का था, मगर हंसी नहीं आई.
             पूछा था, बोले नहीं. खबर थी, अफवाह निकली. अपराध हुआ, गिरफ्तारी न हुयी. संपादक के नाम पत्र भेजा था, छापा नहीं. कविता लिखी, कोई सुननेवाला नहीं है. नाटक हुआ, भीड़ न थी. पिक्चर लगी, चली नहीं. किताब छपी थी, बिकी नहीं. बहुत ढूंढी, मिली नहीं. आई थी, खतम हो गयी.
             क्या करें, कुछ होता नहीं. कुर्सी पर बैठा, मगर ऊंघ रहा है. फ़ाइल पड़ी दस्तखत नहीं हो रहे.क्या है, क्या नहीं है. कर्फ्यू हटा तो फिर झगडे हो गए. स्थिति नियंत्रण में है, मगर ख़तरा बना हुआ है. आदमी हैं, मगर मनुष्यता नहीं रही. दिल हैं, मगर मिलते नहीं. देश अपना हुआ, मगर लोग पराये हो गए. और आप हैं नल में पानी न होने का कह रहे हैं.
                                      साहब , बहुत कुछ है, मगर फिर भी वह नहीं है जिसके लिए वह है.

1 comment:

  1. वाह... बहुत जीवंत... सुंदर भी और सटीक भी... बधाई...

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